
मनरेगा के नाम व स्वरूप में बदलाव के विरोध में कांग्रेस का एकदिवसीय शांतिपूर्ण उपवास, केंद्र सरकार को दी चेतावनी
बीआरएन बक्सर। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी एवं बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार रविवार को जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में एकदिवसीय शांतिपूर्ण उपवास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह उपवास कार्यक्रम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के नाम एवं उसके मूल स्वरूप में बदलाव की चर्चाओं के विरोध में आयोजित किया गया।
उपवास कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय ने की। कार्यक्रम में पूर्व विधायक श्री संजय कुमार तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी, पूर्व विधायक श्री विश्वनाथ राम, डॉ. प्रमोद ओझा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता एवं मनरेगा मजदूर शामिल हुए।
उपवास के समापन पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय ने कहा कि मनरेगा किसी सरकार की कृपा नहीं, बल्कि देश के गरीब और श्रमिक वर्ग का कानूनी अधिकार है। इसके नाम या स्वरूप के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ कांग्रेस पार्टी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 में कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने मनरेगा लागू कर ग्रामीण गरीबों को रोजगार की गारंटी दी थी, जिससे बेरोजगारी, भुखमरी और मजबूरी में होने वाले पलायन पर प्रभावी रोक लगी थी। आज केंद्र सरकार की नीतियों के कारण यह ऐतिहासिक योजना कमजोर होती जा रही है।
डॉ. पांडेय ने कहा कि मनरेगा का नाम बदलने का प्रयास संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के खिलाफ है। यह एक ऐसे रोजगार कानून को धार्मिक रंग देने की कोशिश है, जो हर धर्म, हर जाति और हर वर्ग के नागरिकों के लिए समान रूप से लागू है। उन्होंने सवाल उठाया कि मजदूरों को समय पर मजदूरी क्यों नहीं मिल रही, काम के अवसर क्यों कम किए जा रहे हैं और योजना के बजट में लगातार कटौती क्यों की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नाम बदलने से न रोजगार बढ़ेगा और न ही गरीबों की हालत सुधरेगी, यह केवल जनता का ध्यान असली समस्याओं से भटकाने का प्रयास है।
इस अवसर पर पूर्व विधायक संजय कुमार तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी एवं पूर्व विधायक विश्वनाथ राम ने कहा कि महात्मा गांधी के नाम के साथ इस तरह का राजनीतिक प्रयोग लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार गरीबों की योजनाओं को कमजोर कर उनके अधिकार छीनना चाहती है, जिसे कांग्रेस पार्टी कभी बर्दाश्त नहीं करेगी। डॉ. प्रमोद ओझा ने कहा कि मनरेगा पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जिसने गरीबों को काम के साथ सम्मान दिया। इस योजना के मूल स्वरूप से किसी भी प्रकार का समझौता कांग्रेस पार्टी को स्वीकार नहीं है। कार्यक्रम के दौरान जिला अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय ने सरकार के समक्ष प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें मनरेगा का नाम एवं मूल स्वरूप यथावत रखने, योजना को कमजोर करने के सभी प्रयास तत्काल बंद करने, मजदूरों को समय पर पूरी मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करने, काम मांगने पर काम देने की कानूनी व्यवस्था सख्ती से लागू करने तथा मनरेगा के बजट में पर्याप्त वृद्धि करने की मांग शामिल है। कांग्रेस पार्टी ने आगे की रणनीति की घोषणा करते हुए बताया कि 12 जनवरी से 29 जनवरी तक जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत में चौपाल कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान मनरेगा मजदूर एवं कांग्रेस कार्यकर्ता भारत के राष्ट्रपति के नाम पोस्टकार्ड भेजकर मनरेगा को मजबूत बनाए रखने की मांग करेंगे। डॉ. पांडेय ने चेतावनी दी कि यदि मनरेगा के साथ छेड़छाड़ जारी रही तो कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर संसद तक निर्णायक संघर्ष करेगी।
उपवास कार्यक्रम में कामेश्वर पांडेय, डॉ. सत्येंद्र ओझा, संजय कुमार पांडेय, भोला ओझा, श्रीमती निर्मला देवी, संजय कुमार दुबे, रोहित उपाध्याय, रवींद्रनाथ उपाध्याय उर्फ बुचा उपाध्याय, लक्ष्मण उपाध्याय, युवा कांग्रेस के पंकज उपाध्याय, अभय मिश्रा, ब्लॉक अध्यक्ष राजारमन पांडेय, दयाशंकर सिंह, कमल पाठक, इं. रामप्रसाद द्विवेदी, महेंद्र चौबे, अकबरी नजबून, निशा, शहजाहा, नजिया परवीन, कृष्णकांत दुबे सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।



















