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राजनीतिक डैमेज कंट्रोल में भाजपा सफल, बागी अमरेन्द्र पाण्डेय ने आनंद मिश्रा को दिया समर्थन…

अमित शाह से मुलाकात के बाद अमरेन्द्र पाण्डेय ने लिया नामांकन वापस

बीआरएन बक्सर । बिहार विधान परिषद चुनाव में भाजपा के बागी तेवर दिखा चुके वरिष्ठ नेता अमरेन्द्र पाण्डेय ने आखिरकार पार्टी नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद अपने सुर बदलते हुए निर्दलीय नामांकन वापस ले लिया है। अब वे एनडीए समर्थित भाजपा प्रत्याशी आनंद मिश्रा के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं। इस घटनाक्रम के पीछे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की सक्रिय भूमिका मानी जा रही है। धर्मेंद्र प्रधान ने 18 अक्टूबर को बक्सर आगमन के दौरान होटल वैष्णवी क्लार्क में पार्टी नेताओं और असंतुष्ट कार्यकर्ताओं से लंबी चर्चा की। अमरेन्द्र पाण्डेय से भी उन्होंने व्यक्तिगत बातचीत की और उन्हें पार्टी हित में निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया।

प्रेस वार्ता में दिया एकता का संदेश

रविवार को भाजपा कार्यालय, अहिरौली में आयोजित प्रेस वार्ता में अमरेन्द्र पाण्डेय ने स्पष्ट किया कि उन्होंने एक पल के आक्रोश में नामांकन भरा था, लेकिन अब वे भाजपा की नीति, नीयत और नेतृत्व पर फिर से पूर्ण विश्वास जताते हैं। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी आनंद मिश्रा को छोटा भाई कहते हुए उनके पक्ष में काम करने का संकल्प दोहराया। प्रेस वार्ता की अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश भुवन ने की, जबकि संचालन जिला मीडिया प्रभारी उमाशंकर राय ने किया। इस अवसर पर भाजपा एमएलसी जीवन कुमार, क्षेत्रीय प्रभारी अशोक भट्ट, भाजपा प्रत्याशी आनंद मिश्रा और बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद

रहे।

  अर्बन नक्सली’ बयान पर दी सफाई

हाल ही में अमरेन्द्र पाण्डेय द्वारा आनंद मिश्रा को ‘अर्बन नक्सली’ कहे जाने पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने सफाई दी कि वह बयान परिस्थितिवश दिया गया था और अब वह अतीत की बात है। उन्होंने इस प्रकरण को समाप्त मानने की अपील की।कार्यक्रम के अंत में उपस्थित कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाज़ी कर संदेश देने की कोशिश की कि भाजपा कार्यकर्ता एकजुट हैं और आने वाले चुनाव में बक्सर सीट को ऐतिहासिक जीत में बदलने के लिए प्रतिबद्ध हैं।भाजपा नेतृत्व द्वारा समय रहते उठाए गए कदमों से पार्टी में संभावित टूट को रोका गया है और चुनावी माहौल को फिर से साधने की कोशिश की गई है।राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को भाजपा नेतृत्व की “डैमेज कंट्रोल” रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे पार्टी में संभावित टूट को समय रहते रोका गया है। अब देखना होगा कि यह एकता चुनाव परिणामों पर कैसा असर डालती है।

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