लटकती मौत…..जिम्मेवार कौन ….?
15 मई को मीठापुर में हुई हादसा व विभाग के कर्मी पर एफआईआर दर्ज के बाद भी विभाग लापरवाह
जिला पार्षद विकास ने सीतमपुरा गांव का दौरा कर स्थिति से विभाग के अधिकारियों को कराया अवगत
राजीव कुमार पाण्डेय (भभुआ)। स्थानीय प्रखंड क्षेत्र सहित जिले के विभिन्न हिस्सों में आए दिन बिजली के तार से प्रवाहित करंट की चपेट में आने से मौत की खबरें आती रहती हैं। ऐसी ही एक खबर 15 मई को मीठापुर गांव से आयी।जहां पर घर के ऊपर से गुजर रहे 440 वोल्ट की तार से प्रवाहित करंट की चपेट में आकर एक चार वर्षीय बच्ची नीलम कुमारी की दर्दनाक मौत हो गई।इस मामले में मृतका के पिता द्वारा बिजली विभाग के कनीय अभियंता सोनू गुप्ता पर लापरवाही बरतने,घुस न देने के एवज मे नंगे तार को नही हटाने को लेकर प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई लेकिन विभाग के ऊपर इसका कोई असर पड़ता नही दिख रहा है।इधर स्थानीय जिला पार्षद विकास सिंह उर्फ लल्लू पटेल क्षेत्र के गांव में घूम – घूम कर यह जायजा ले रहे की किस किस गांव में आज भी नंगे तार घरों के समीप व छतों के ऊपर से गुजर रही है।इसी क्रम में शुक्रवार को जिला पार्षद विकास ने मिंव पंचायत के सीतमपुरा गांव का दौरा किया और गली – गली चलकर गांव में बिछी तारों की स्थिति और ग्रामीणों से बात करके अभी तक नंगी तार से हुए नुकसानों के बारे में जाना और मौके से ही फोन लगाकर बिजली विभाग के अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया। हाई वोल्टेज तारों की अगर हम कैमूर की बात करें तो 1980-90 के दशक में करीब – करीब सभी गांवों में बिजली का नंगा तार बिछ गया और ग्रामीणों को बिजली मिलने लगी।बदलते दौर में सरकार द्वारा बिजली का प्राइवेटिकरण करते हुए उन्हीं गांवों में साउथ बिहार पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड द्वारा नए – नए पोल के साथ कवर के तार लगाए गए हैं लेकिन विभाग की उदासीनता के कारण आज भी बहुतेरे गांवों में नंगे तार में ही बिजली की सप्लाई है।कई गांव में पोल की जगह बांस के सहारे नंगे तार झूलते हुए नजर आ रहे हैं।सरकार द्वारा नंगे तारों को हटाकर कवर तार लगाने की मुहिम का मुख्य वजह हादसों में गिरावट लाना है।जो विभाग के अधिकारियों व कर्मियों की लापरवाहियों के वजह से दम तोड़ रहा है।आखिर लोगों के मन में दक्ष प्रश्न यही उठ रहा है कि लटकती मौत का जिम्मेवार कौन?
मन में हमेशा डर बना रहता है गरीबों की कोई नही सुनता- ग्रामीण
सीतमपुरा गांव के ग्रामीण महेंद्र बिंद,वार्ड सदस्य रमेश बिंद,बाली बिंद ,सचनु बिंद व फौजदार बिंद ने जिला पार्षद को बताया कि बस्ती के घरों के ऊपर व पास से गुजर रही नंगी तार की वजह से मन में हमेशा भय बना रहता है।बिजली की तार से होनेवाली दुर्घटनाओं को सुन – सुन कर मन सिहर उठता है।ग्रामीणों ने आगे कहा कि गांव में कवर का तार नंगे तार के साथ बिछा हुआ है लेकिन आज भी नंगे तार मे ही बिजली की सप्लाई है।नंगे बिजली के तारों को हटाने व कवर तार में बिजली सप्लाई करने को लेकर कई बार बिजली विभाग के कर्मियों व अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई आज तक नहीं हुई।आखिर गरीब की बातों को सुनता कौन है।पूर्व में कई बच्चें एवं पशु बिजली की तार की चपेट में आ चुके हैं।
जानिए क्या कहते हैं जिला पार्षद
सीतमपुरा गांव में पहुंचे जिला पार्षद ने बताया कि मीठापुर की घटना के बाद से कई गांवों में जाकर बिजली सप्लाई की स्थिति को जाना परखा है।कुछ कुछ गांवों में छोटी मोटी समस्याएं हैं जो विभाग की उदासीनता को दर्शाता है।मेरे द्वारा दौरा किए जा रहे गांवों की स्थिति से विभाग को अवगत कराया जा रहा है।आज भी मैंने इस गांव की स्थिति के बारे में अवगत कराया है।जल्द ही समस्या का हल निकालने की बात विभाग के अधिकारियों द्वारा कही गई है अगर विभाग के अधिकारियों द्वारा अब भी सार्थक पहल किया जाए तो लोगों को जान- माल से होने वाले नुकसानों से एक दो दिनों में ही बचाया जा सकता है।इसको लेकर मेरा प्रयास जारी है। अगर बिजली विभाग के अधिकारी मेरे बातों को अनसुना करते हैं तो भभुआ में बहुत बड़ा आंदोलन होगा।














