
बाबू जगजीवन राम के नक्शे कदम पर चलने का प्रयास करूंगा:- सांसद
ईमानदारी के प्रतिमूर्ति थे बाबू जगजीवन राम शाहाबाद के विकास में अमूल्य योगदान: प्रकाश सिंह
खरीगांवा में धूमधाम से मना उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की 38 वीं पुण्यतिथि
राजीव कुमार पाण्डेय (भभुआ)।भारत के पूर्व उपप्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की 38 वीं पुण्यतिथि पर चैनपुर विधानसभा क्षेत्र के हाटा बाजार स्थित खरीगांवा चौक के पास उनकी आदमकद प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष सुनील कुशवाहा ने किया। जहां वक्ताओं ने बाबू जगजीवन राम के कृतित्व व व्यक्तित्व पर बारी – बारी से प्रकाश डाला।इस क्रम में सासाराम के सांसद मनोज राम ने कहा कि वर्ष 1946 में पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में गठित प्रथम लोकसभा में बाबूजी ने श्रम मंत्री के रूप में देश की सेवा की व अगले तीन दशकों तक कांग्रेस मंत्रिमंडल की शोभा बढ़ाई ।इस महान राजनीतिज्ञ ने भारतीय राजनीति को अपने जीवन के 50 वसंत से भी अधिक दान में दिए हैं ।संविधान के निर्माणकर्ताओं में से एक बाबूजी ने सदैव सामाजिक न्याय को सर्वोपरि माना। उन्हें श्रम, रेलवे, कृषि, संचार व रक्षा मंत्रालय उपप्रधानमंत्री का दायित्व दिया गया, उसका सदैव कल्याण ही हुआ। बाबूजी ने हर मंत्रालय से देश को तरक्की पहुँचाने का अथक प्रयास किया।वे सासाराम से आजीवन सांसद रहे।मुझे भी उनकी सीट पर प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला है इस अवसर का लाभ हरेक वर्ग को मिलेगा।मेरा प्रयास बाबू जी के नक्शे कदम पर चलना रहेगा।वहीं सभा को संबोधित करते हुए चैनपुर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी प्रकाश सिंह ने कहा कि बाबू जगजीवन राम के जीवन के कई पहलू हैं। उनमें से ही एक है भारत में संसदीय लोकतंत्र के विकास में उनका अमूल्य योगदान। 28 साल की उम्र में ही 1936 में उन्हें बिहार विधान परिषद् का सदस्य नामांकित कर दिया गया था। जब गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 के तहत 1937 में चुनाव हुए तो बाबूजी डिप्रेस्ड क्लास लीग के उम्मीदवार के रूप में निर्विरोध एमएलए चुने गए।अंग्रेज बिहार में अपनी पिट्ठू सरकार बनाने के प्रयास में थे। उनकी कोशिश थी कि जगजीवन राम को लालच देकर अपने साथ मिला लिया जाए। उन्हें मंत्री पद और पैसे का लालच दिया गया, लेकिन जगजीवन राम ने अंग्रेजों का साथ देने से साफ इनकार कर दिया। उसके बाद ही बिहार में कांग्रेस की सरकार बनी, जिसमें वह मंत्री बने। साल भर के अंदर ही अंग्रेजों के गैरजिम्मेदार रुख के कारण महात्मा गांधी की सलाह पर कांग्रेस सरकारों ने इस्तीफा दे दिया। बाबूजी इस काम में सबसे आगे थे। पद का लालच उन्हें छू नहीं सकता था। बाद में वह महात्मा गांधी के सविनय अवज्ञा आन्दोलन में जेल गए। जब मुंबई में 9 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की तो जगजीवन राम वहीं थे। तय योजना के अनुसार उन्हें बिहार में आंदोलन को तेज करना था, लेकिन दस दिन बाद ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। बाबू जी की कीर्ति आज भी अमर है।शाहाबाद के किसान आबाद हैं तो इसमें बाबू जी का अहम योगदान है।उक्त अवसर पर पूर्व जिलाध्यक्ष उपेन्द्र सिंह , राधेश्याम कुशवाहा, अनिल तिवारी ,जिला उपाध्यक्ष विनोद सिंह , जिला महासचिव राणा प्रताप सिंह,चैनपुर प्रखंड अध्यक्ष जयप्रकाश यादव, चांद प्रखंड अध्यक्ष महेन्द्र सिंह कुशवाहा,भगवानपुर प्रखंड कांग्रेस अध्यक्ष (प्र) सोनू कुशवाहा, अभिनव सिंह ,राजकेश्वर त्रिपाठी,चैनपुर विधानसभा युवा कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धार्थ मिश्रा , त्रिलोकी बिंद,घूरा बिंद, कमलेश राम , ओम प्रकाश रजक, कुंवर सिंह पटेल, दिलावर अंसारी , मस्तान खान, गुड्डू अंसारी,नजीर अंसारी, हनुमान यादव, ओम प्रकाश चौबे, अलियार साह,समेत तमाम कांग्रेसी कार्यकर्ता मौजूद थे।












