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विजयादशमी महोत्सव: रामलीला में “कैकेयी-मंथरा संवाद” और कृष्णलीला में “जालंधर वध” का हुआ सजीव मंचन

बीआरएन बक्सर। नगर के किला मैदान स्थित रामलीला मंच पर चल रहे 22 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव के दसवें दिन मंगलवार की रात श्री रामलीला समिति के तत्वावधान में भव्य रामलीला एवं कृष्णलीला का मंचन किया गया। इस अवसर पर “कैकेयी-मंथरा संवाद” तथा “जालंधर वध” जैसे रोचक और भावनात्मक प्रसंगों का जीवंत चित्रण किया गया।

कैकेयी-मंथरा संवाद ने दर्शकों को किया भावुक

वृंदावन से पधारी श्री राधा माधव रासलीला एवं रामलीला मंडल के कलाकारों ने स्वामी श्री सुरेश उपाध्याय ‘व्यास’ के निर्देशन में कैकेयी-मंथरा संवाद का मंचन किया। कथा के अनुसार, जब राजा दशरथ को अपने बालों में सफेदी नजर आती है, तो वे श्रीराम के राज्याभिषेक का निर्णय लेते हैं। यह समाचार सुनकर अयोध्यावासी हर्षोल्लास से नगर सजाने लगते हैं।इसी बीच मंथरा जब यह बात सुनती है, तो कैकेयी को भड़काती है। शुरू में कैकेयी प्रसन्न होती हैं, परंतु मंथरा के बहकावे में आकर उन्हें अपने दो वरदानों की याद आती है। अंततः कैकेयी कोप भवन में जाकर राजा दशरथ से राम के 14 वर्षों के वनवास और भरत के लिए राज्य की मांग करती हैं। यह सुनकर दशरथ अंदर से टूट जाते हैं। कलाकारों की सजीव अभिनय शैली ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

कृष्णलीला में ‘जालंधर वध’ प्रसंग ने किया प्रभावित

दिन के समय कृष्णलीला के अंतर्गत “जालंधर वध” का मंचन किया गया, जिसमें जालंधर के उत्पत्ति से लेकर वध तक की कथा को भावनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया। कथा के अनुसार, जालंधर एक शक्तिशाली राक्षस होता है जिसकी पत्नी वृंदा पतिव्रता धर्म का पालन करती है। उसकी तपस्या के प्रभाव से जालंधर अजेय बना रहता है।भगवान विष्णु द्वारा छलपूर्वक जालंधर का रूप धारण कर वृंदा की पतिव्रता शक्ति को भंग किया जाता है। इसके पश्चात भगवान शंकर जालंधर का वध करते हैं। जब वृंदा को सच्चाई का पता चलता है, तो वे भगवान विष्णु को श्राप देती हैं कि वे पत्थर बन जाएं। इसके फलस्वरूप भगवान विष्णु शालिग्राम शिला के रूप में प्रकट होते हैं, और वृंदा के शरीर से तुलसी का पौधा उत्पन्न होता है। आकाशवाणी होती है कि वृंदा की पूजा के बिना विष्णु पूजन अधूरा रहेगा।

बुधवार को निकलेगी श्रीराम की वनगमन यात्रा

समिति के संयुक्त सचिव हरिशंकर गुप्ता ने जानकारी दी कि बुधवार को शाम 4:30 बजे श्रीराम की वनगमन यात्रा निकाली जाएगी, जो किला मैदान से नगर भ्रमण करते हुए कमलदह पोखर पहुंचेगी। वहां केवट संवाद का मंचन किया जाएगा। इसके उपरांत रामलीला मंच पर आगामी लीलाओं का मंचन जारी रहेगा।

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