
मिट्टी की दीवार से पक्के भवन तक पहुंचा कल्याणपुर मध्य विद्यालय , लेकिन बाउंड्री व पंखे के अभाव में बदहाल व्यवस्था
बक्सर/इटाढ़ी: बक्सर जिले के इटाढ़ी प्रखंड अंतर्गत चिलहर पंचायत के कल्याणपुर गांव स्थित मध्य विद्यालय विकास की मिसाल तो बना है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की कमी अब भी बच्चों और शिक्षकों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। कभी मिट्टी की दीवार और खपरैल वाले दो कमरों में पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं चलती थीं, वहीं आज यह विद्यालय सोलह कमरों वाले पक्के भवन में तब्दील हो चुका है और यहां कक्षा आठ तक पढ़ाई हो रही है। विद्यालय में करीब 380 विद्यार्थी नामांकित हैं।
पहले इस विद्यालय में केवल तीन शिक्षक थे, जो पहली से पांचवीं तक की सभी कक्षाओं को संभालते थे। अब स्थिति बदली है। विद्यालय में न शिक्षकों की कमी है और न ही कमरों की। एक छोटा पुस्तकालय, दो शौचालय और दो चापाकल जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। शिक्षक बच्चों को बेहतर शिक्षा देने में लगे हुए हैं।लेकिन सवाल यह है कि जब भवन, शिक्षक और अन्य संसाधन उपलब्ध हैं, तो फिर विद्यालय की सुरक्षा और बच्चों की सुविधा पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा है? विद्यालय में बाउंड्री वाल नहीं होने के कारण असामाजिक तत्व आए दिन स्कूल परिसर में घुसकर सामानों को नुकसान पहुंचाते हैं। शिक्षकों का कहना है कि कई बार विद्यालय में रखे सामान चोरी हो जाते हैं या तोड़फोड़ कर दी जाती है।
विद्यालय के बच्चों ने बताया कि गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है, लेकिन कक्षाओं में लगे पंखों को असामाजिक तत्वों द्वारा तोड़ दिया गया है। साथ ही बिजली के तार और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चोरी कर लिए गए हैं या क्षतिग्रस्त कर दिए गए हैं। इसके कारण विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है, जिससे पढ़ाई करने में छात्रों को काफी परेशानी हो रही है। तपती गर्मी में बच्चे पसीने से तरबतर होकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। एक ओर सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। सिर्फ भवन निर्माण कर देने भर से शिक्षा व्यवस्था बेहतर नहीं हो जाती।जब तक विद्यालयों की सुरक्षा, बिजली व्यवस्था, पंखे और अन्य आवश्यक सुविधाओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जाएगा, तब तक विकास के दावे अधूरे ही रहेंगे। अब जरूरत है कि शिक्षा विभाग इस विद्यालय की समस्याओं पर तत्काल संज्ञान ले और बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराए।















