
नेताजी के विचारों से ही सशक्त और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण संभव– डाॅ मनोज पांडेय
पराक्रम दिवस के रूप में मनाई गई नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती
बीआएन बक्सर। जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यालय परिसर में शुक्रवार को आज़ाद हिंद फौज के संस्थापक, भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महान अग्रणी योद्धा एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती श्रद्धा, सम्मान और देशभक्ति के भाव के साथ मनाई गई। यह कार्यक्रम पराक्रम दिवस के रूप में आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता बक्सर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडे ने की।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. मनोज पांडे ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के ऐसे महानायक थे, जिन्होंने देश को आज़ादी की दिशा में नई राह दिखाई और विश्व पटल पर भारत को एक स्वाभिमानी व आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में पहचान दिलाई। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष के लिए अपने नेतृत्व में आज़ाद हिंद फौज का गठन किया तथा “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा” जैसे ओजस्वी नारे से देशवासियों में साहस, त्याग और पराक्रम की भावना का संचार किया।
डॉ. पांडे ने कहा कि जब देश की एकता और अखंडता पर गहरा आघात हो रहा था, तब नेताजी के नेतृत्व, विचारों और दृढ़ संकल्प ने राष्ट्र को एकजुट करने का कार्य किया। उनका संघर्ष, त्याग और राष्ट्रभक्ति आज भी हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्वजों के बलिदानों का स्मरण हमें मानसिक व नैतिक शक्ति देता है और जनता की सेवा के लिए सकारात्मक आधार तैयार करता है। कार्यक्रम में उपस्थित नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नेताजी के जन्मदिवस को पराक्रम दिवस के रूप में मनाते हुए उनके साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति को नमन किया तथा उनके बताए मार्ग पर चलकर देश व समाज की निस्वार्थ सेवा का संकल्प लिया।
इस अवसर पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता विद्यापति तिवारी, संजय दुबे, त्रिजोगी मिश्रा, बबन तुरहा, राकेश यादव, धनजी सेठ, सद्दाम सहित बक्सर जिला कांग्रेस कमेटी के अनेक वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने नेताजी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण से हुई। “नेताजी अमर रहें” के नारों से वातावरण देशभक्ति से ओतप्रोत हो गया। अंत में राष्ट्रहित, सामाजिक एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।

















