
गोकुल जलाशय बना प्रवासी पक्षियों का महाकुंभ, जिलाधिकारी ने किया विकास कार्यों का निरीक्षण
गोकुल जलाशय प्राकृतिक धरोहर, प्रवासी पक्षियों का जीवित संग्रहालय : – जिलाधिकारी साहिला
बीआरएन बक्सर। जिला पदाधिकारी साहिला द्वारा मंगलवार को गोकुल जलाशय के विकास से संबंधित कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया गया। इस दौरान उन्होंने गोकुल जलाशय को जिले की प्राकृतिक धरोहर बताते हुए कहा कि यह आर्द्रभूमि जैव विविधता का जीवित संग्रहालय है और पक्षी विशेषज्ञों व बर्डवॉचर्स के लिए एक अनूठा स्थल है।
जिलाधिकारी ने बताया कि प्रति वर्ष गोकुल जलाशय में प्रवासी पक्षियों का महाकुंभ लगता है। यहां लगभग 65 प्रजातियों के करीब 3500 प्रवासी पक्षी आते हैं, जिनमें नॉर्दर्न शोवलर, गार्गेनी, रूडी शेलडक, ऑस्प्रे, केस्ट्रेल, सैंडपाइपर, येलो वैगटेल सहित दुर्लभ प्रजातियों के पक्षी जैसे इजिप्शियन वल्चर (सफेद गिद्ध) भी शामिल हैं। बिहार में वर्ष 2022 से लगातार सबसे अधिक प्रवासी पक्षियों की प्रजातियां यहीं देखी गई हैं। गोकुल जलाशय अंचल ब्रह्मपुर एवं चक्की अंतर्गत अवस्थित है। अंचल चक्की में सभी मौजों का सीमांकन कार्य पूर्ण कर लिया गया है, जबकि अंचल ब्रह्मपुर में शेष सीमांकन कार्य प्रगति पर है। जिलाधिकारी ने भूमि सुधार उप समाहर्ता डुमरांव को निर्देश दिया कि सीमांकन कार्य शीघ्र पूर्ण कराना सुनिश्चित करें। वहीं कार्यपालक अभियंता ग्रामीण कार्य प्रमंडल बक्सर को जलाशय के समीप पथ मरम्मति कराने का निर्देश दिया गया। वन प्रमंडल पदाधिकारी बक्सर ने बताया कि गोकुल जलाशय के समीप रेस्क्यू सेंटर, इंटरप्रिटेशन सेंटर, टूरिस्ट हब, वॉच टावर और गेस्ट हाउस के निर्माण हेतु कार्य योजना तैयार की जा रही है। जलाशय के आसपास आधारभूत संरचना निर्माण के लिए अंचल कार्यालय चक्की में चल रही कुछ जमाबंदियों को विधिसम्मत कार्रवाई के तहत रद्द करने का निर्देश भी दिया गया, ताकि निर्माण कार्य समय पर प्रारंभ हो सके। निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि स्थानीय ग्रामीणों द्वारा नदी में अपशिष्ट पदार्थ व मूर्ति विसर्जन किया जा रहा है, जिससे जलीय जीव-जंतुओं के अस्तित्व पर संकट की आशंका है। इस पर जिलाधिकारी ने अंचलाधिकारी चक्की एवं भूमि सुधार उप समाहर्ता डुमरांव को निर्देश दिया कि अपशिष्ट प्रवाह के लिए आसपास कृत्रिम तालाब का निर्माण कराया जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि आर्द्रभूमि पृथ्वी के जलवायु संतुलन, जल शुद्धिकरण और बाढ़ नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। गोकुल जलाशय को रामसर स्थल के रूप में घोषित किया गया है और जलकुंभी की सफाई तथा खुले जल क्षेत्र के कारण यह पक्षियों के लिए आदर्श आश्रय स्थल बन गया है।वेटलैंड के महत्व से आमजन और छात्र-छात्राओं को अवगत कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन एवं वन प्रमंडल द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। विश्व आर्द्रभूमि दिवस (02 फरवरी 2026) के अवसर पर विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को गोकुल जलाशय भ्रमण कराया जाएगा। इस कार्यक्रम की सभी तैयारियां सुनिश्चित कराने हेतु नोडल पदाधिकारी नमामि गंगे को वन प्रमंडल पदाधिकारी से समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया गया। निरीक्षण के क्रम में अनुमंडल पदाधिकारी डुमरांव, अंचलाधिकारी ब्रह्मपुर, अंचलाधिकारी चक्की सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।















