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साहित्य ,संस्कृति व सनातन की रक्षा करते है ब्राह्मण- आचार्य गुप्तेश्वर जी महाराज

नारद मोह प्रसंग की भाव पूर्ण व्याख्या

बीआरएन, बक्सर।

सती घाट स्थित लाल बाबा आश्रम परिसर में चल रहे श्रीराम कथा के तीसरे दिन श्रीमज्जगदगुरु रामानुजाचार्य आचार्य गुप्तेश्वर जी महाराज ने नारद मोह प्रसंग की भाव पूर्ण व्याख्या की। उन्होंने कहा कि साधना से सिद्धि मिलती है और सिद्धि ही  प्रसिद्धि को देती है । लेकिन साधु को प्रसिद्धि से विचलित नहीं होनी चाहिए, क्योंकि प्रसिद्धि पतन का कारण भी होता है।

जिस तरह काम विजय की प्रसिद्धि से देवर्षि नारद का अहंकार सिर चढ़ गया, लिहाजा उन्हें पतन से बचाने के लिए नारायण को मोहिनी लीला करनी पड़ी। कथा के जरिये जगद्गुरू ने कहा कि कैसे रजो गुण और सतो गुण से भी ऊपर उठना पड़ता है तभी नारायण की कृपा होती है। कथा को विस्तार देते हुए उन्होने कहा कि सनातन तभी है, जब धार्मिक साहित्य और संस्कृत है।  इसे ब्राह्मणों ने बचाकर रखा है। मौके पर भोजपुरी साहित्य मंडल के अध्यक्ष व कांग्रेस के पूर्व प्रदेश सचिव अनिल त्रिवेदी के अतिरिक्त काफी संख्या मे कथा श्रवण करने वाले श्रद्धालुओं की मौजूदगी  रही ।

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