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धान अधिप्राप्ति को लेकर पैक्स एवं व्यापार मंडलों की सात सूत्री मांग, डीएम की अनुपस्थिति में डीडीसी को सौंपा ज्ञापन

बीआरएन बक्सर। धान अधिप्राप्ति कार्य को सुचारु एवं पारदर्शी बनाने तथा पैक्स और व्यापार मंडलों की विभिन्न समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, आरा के अध्यक्ष सत्येन्द्र नारायण सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन को सात सूत्री ज्ञापन सौंपा।

इस दौरान जिला पदाधिकारी श्रीमती साहिला जिला मुख्यालय में उपस्थित नहीं थीं। उनकी अनुपस्थिति में उप विकास आयुक्त श्रीमती निहारिका ने शिष्टमंडल से ज्ञापन प्राप्त किया।ज्ञापन के अनुसार, 30 अक्टूबर को सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक, आरा में भोजपुर एवं बक्सर जिले के पैक्स और व्यापार मंडलों के अध्यक्षों की बैठक आयोजित की गई थी। इसमें धान अधिप्राप्ति कार्य से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में आगामी 15 नवंबर से शुरू होने वाले धान अधिप्राप्ति सत्र को बेहतर ढंग से संचालित करने के लिए सात प्रमुख मांगों पर आवश्यक कार्रवाई का निर्णय लिया गया।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि राज्य खाद्य निगम (SFC) द्वारा समितियों को समय पर भुगतान नहीं किए जाने के कारण पैक्स एवं व्यापार मंडलों पर अतिरिक्त ब्याज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। अगस्त 2026 तक समितियों पर लगभग 9 करोड़ रुपये अतिरिक्त ब्याज का भार बताया गया है। इस बकाया राशि एवं अतिरिक्त ब्याज का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग की गई।

इसके अलावा धान अधिप्राप्ति एवं सीएमआर जमा करने की प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए पैक्स, संबंधित सहकारी बैंक तथा एसएफसी के बीच त्रिपक्षीय समझौता कराने की मांग उठाई गई। इससे सीएमआर जमा होने के बावजूद भुगतान एवं ऋण समायोजन में आने वाली परेशानियों का समाधान हो सकेगा।

ज्ञापन में मिल टैगिंग की प्रक्रिया में पैक्स एवं व्यापार मंडलों को स्वायत्तता देने तथा राइस मिलों पर अनावश्यक दबाव बनाकर मनमाने ढंग से टैगिंग किए जाने पर रोक लगाने की मांग की गई। साथ ही मिलरों द्वारा एडवांस सीएमआर की आपूर्ति सुनिश्चित कराने पर भी जोर दिया गया।

प्रतिनिधिमंडल ने वर्ष 2025-26 में सीएमआर एवं धान की आपूर्ति के बाद लंबित लगभग 6 करोड़ रुपये का भुगतान शीघ्र कराने की मांग की। वहीं, समितियों की बढ़ती आर्थिक कठिनाइयों को देखते हुए प्रबंधकीय अनुदान की राशि 30 रुपये से बढ़ाकर 60 रुपये प्रति क्विंटल सीएमआर तथा बोरे की राशि 25 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये प्रति क्विंटल धान करने का प्रस्ताव रखा गया।इसके अतिरिक्त मिलिंग क्षमता को ध्यान में रखते हुए उसना एवं अरवा चावल के लिए 50-50 प्रतिशत का लक्ष्य निर्धारित करने तथा धान अधिप्राप्ति में फार्मर आईडी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग भी शामिल है।शिष्टमंडल ने उप विकास आयुक्त से अनुरोध किया कि सभी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए संबंधित विभागों एवं पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएं, ताकि आगामी धान अधिप्राप्ति सत्र में पैक्स एवं व्यापार मंडलों को आर्थिक एवं प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़े।

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